COVID19 Update : लो अब आ गया ग्रीन फंगस, कोरोना में नई मुसीबत

इंदौर में ग्रीन फंगस का पहला मरीज मिला। स्थिति नहीं संभली तो उसे मुंबई भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपरजिलस फंगस को ही सामान्य भाषा में ग्रीन फंगस कहा जाता है।

नई दिल्ली। कोरोना काल में कई फंगस पहले से ही थे, अब ताजा मामला मध्य प्रदेश से है। इंदौर में एक नया मरीज मिला है, जिसमें हरे रंग का फंगस पाया गया है। डाॅक्टरों ने शुरुआती जांच में इसे ग्रीन फंगस कहा है। जिन लोगों को पहले से कोई एलर्जी होती है, ग्रीन फंगस से संक्रमित होने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।

इंदौर के माणिक बाग रोड इलाके में रहने वाले 34 वर्षीय विशाल श्रीधर को कुछ दिन पहले कोरोना हुआ। फिर से परेशानी होने पर उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा। श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ.रवि दोसी ने बताया कि पहले हमें संदेह था कि मरीज को ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) संक्रमण हुआ है। परीक्षण करने पर पता चला कि उसके साइनस, फेफड़े और ब्‍लड में ग्रीन फंगस (Aspergillosis) इंफेक्‍शन हो गया है।

विशाल श्रीधर के दाएं फेफड़े में मवाद भर गया था, जिसे निकालने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली।अब हिंदुजा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्‍टरों का मानना है कि यह ग्रीन फंगस का देश का पहला मामला है। विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपरजिलस फंगस को ही सामान्य भाषा में ग्रीन फंगस कहा जाता है। एसपरजिलस कई तरह की होती है। ये शरीर पर काली, नीली हरी, पीली हरी और भूरे रंग की पाई जाती है।

हालांकि, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स नई दिल्ली के डाॅक्टर निखिल टंडन का कहना है कि फंगस को किसी रंग विशेष के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इन फंगल संक्रमणें को रंग के आधार पर वर्गीकृत करना उचित नहीं है। सफेद फंगल संक्रमण वास्तव में कैंडिडिआसिस है, जो कैंडिडा के कारण होता है। यूकोरमायकोसिस, जिसे लोग काले कवक यानी ब्लैक फंगस के नाम से जानते हैं, असलियत में वह काले रंग का नहीं होता है।